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हमें बच्चों को सोचना सिखाना है : श्री मनीष सिसोदिया की कलम से

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दिल्ली के उप मुख़्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री श्री मनीष सिसोदिया के द्वारा लिखा गया ये लेख मुझे बहुत पसंद आया इसलिए आप सबके साथ शेयर कर रहा हूँ।

” आजकल दुनिया भर के स्कूलों में ग्रोथ माइंडसेट (Growth MindSet ) पर काम चल रहा है। शोधकर्ताओं ने लाखों सफल लोगों की मानसिकता का अध्ययन कर ये प्रमाण दिए  है कि स्कूली शिक्षा के दौरान अगर बच्चे को सोचने का तरीका सिखा दिया जाए तो जीवन भर उसका मस्तिष्क ग्रोथ माइंडसेट Growth MindSet के साथ हर एक चुनौती को स्वीकार करता है और असफलता को भी सफलता की दिशा में एक सीढ़ी के रूप में इस्तेमाल करके आगे बढ़ जाता है।

Growth Mindset क्या है।

ग्रोथ माइंडसेट Growth MindSet को हिन्दी में स्थापित शब्दों के जरिये समझने की कोशिश करें तो अनुवाद में सबसे नजदीक ” विकसित मानसिकता” अथवा “स्वतंत्र मानसिकता ” से आता है लेकिन हिंदी में विकसित एवं स्वतंत्र मानसिकता के अर्थ जोड़े जा सकते हैं जो ग्रोथ माइंड सेट को समझने में भ्रम पैदा कर सकते हैं।  इसलिए सुविधा के लिए हम यहाँ ग्रोथ माइंड सेट का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ेंगे।

Growth Mindset ग्रोथ माइंडसेट का मतलब है कि किसी भी व्यक्ति की सोचने का तरीका क्या है, उसका दुनिया को देखने समझने और जीने का क्या नजरिया क्या है।,  वह व्यक्ति मेहनत , प्रतिभा , योग्यता  और परिणाम और साथ में किस्मत को लेकर जो सोच अपने दिमाग में लगातार बनाकर चलता उसको , उस व्यक्ति का माइंडसेट कहते है।

माइंडसेट पर दुनिया सबसे महत्वपूर्ण कार्य स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर कैरेल डेवेक ने किया है। माइंडसेट के बारे में लिखी गई उनकी दो पुस्तकों माइंडसेट – चेंजिंग द वे यू थिंक टू फुलफिल योर पोटेंशिअल और माइंडसेट- न्यू साइकोलॉजी ऑफ सक्सेस नहीं सारी दुनिया को सोचने के तरीकों को लेकर नई समझ पैदा की है। उनके द्वारा किए गए शोध और उनके विश्लेषण से निकाले गए निष्कर्षों ने शिक्षा जगत के अंदर क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिए हैं।

प्रोफेसर कैरेल डेवेक का कहना है कि हम अपने व्यक्तित्व के बारे में जिस प्रकार की भी धारणा रखते हैं वह बहुत हद तक हमारी सोच यानी हमारी मानसिकता पर निर्धारित होता है। यही हमारा माइंड सेट है।

Growth Mindset study

हम अपने आसपास, अपने स्कूल दो तरह के बच्चे देखते है। – सामान्य भाषा में हम उन्हें ” प्रभावशाली बच्चे ” और ” बुद्धू बच्चों ” के रूप में दो वर्गों में रखते आए हैं।  लेकिन शिक्षा और मनोविज्ञान के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण शोधो से अब यह स्थापित हो गया है जिन्हें हम प्रभावशाली तथा बुद्धू बच्चों की श्रेणी में रखते हैं वह दरअसल बच्चों की दो श्रेणी नहीं है।

बच्चें तो सभी एक जैसे ही पैदा होते हैं.यह सोचने के तरीके यानी माइंडसेट की ही दो श्रेणी है।

  • ग्रोथ माइंडसेट (Growth MindSet )
  • फिक्स्ड माइंड सेट (Fixed MindSet)

MindSet को समझने के लिए हम अपने ही बीच प्रचलित एक और शब्द को भी ध्यान से देखते हैं।  वह है – स्मार्ट होना। हम अक्सर देखते हैं कि बहुत से लोग बहुत मेहनत करते हैं लेकिन मैं इतने ‘स्मार्ट’ नहीं होते। जबकि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो मेहनत तो करते हैं लेकिन अलग तरीके से करते हैं और ‘स्मार्ट’ कहलाते है। ऐसा क्यों होता है कुछ लोग ज्यादा स्मार्ट होते हैं और बाकी कम स्मार्ट होते हैं ? क्या कुछ ऐसा होता है जो उन्हें स्थायी रूप से ‘स्मार्ट; बना देता है।

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Smart लोग कैसे होते है

लोगों के स्मार्ट होने को भी मानव जाति के इतिहास में अलग अलग समय पर अलग अलग रूप में समझा गया है।

एक लंबे समय तक विशेषज्ञ दुनिया को समझाते रहे कि किसी व्यक्ति का स्मार्ट होना उसकी शारीरिक बनावट की वजह से संभव होता है, जैसे कि उसके शरीर की बनावट और वंशानुगत गुण इत्यादि इत्यादि और दुनिया इस बात पर यकीन करके ही चलती रही।  हजारों वर्ष तक मानव जाति इस विश्वास में जीती रही थी स्मार्ट लोग कुछ विशेष खानदान या वंश में पैदा हुए लोग ही हो सकते है।

फिर एक ऐसा समय भी आया जब विशेषज्ञों ने समझाया कि आपके स्मार्ट होने पर आपके आस पास के वातावरण का बहुत ज्यादा असर होता है। जैसा आपके आसपास का वातावरण होता है आप वैसे बन जाते हैं। अब क्योंकि खास तरह का वातावरण हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध नहीं था इसलिए यह भी अवधारणा हावी रही कि स्मार्ट होना कुछ विशेष लोगों या विशेष व्यक्ति में पैदा हुए लोगों का यह अधिकार है।

धीरे-धीरे समय आगे बढ़ा और यह धारणा भी टूटी क्योंकि विपरीत परिस्थितियों में लोगों को सफल होते हुए देखा और बेहतर वातावरण के लोगों पूरी तरह असफल होते हुए भी देखा गया।

लोगों का विश्वास बना कि किसी व्यक्ति के वंशानुगत गुण जो भी हो और उसके आसपास का वातावरण भी चाहे जैसा हो,अपने अनुभव और प्रशिक्षण से अपनी मानसिकता को विकसित करने यानी एक खास तरह का माइंड सेट बनाने की योग्यता हर व्यक्ति में होती है। और ये माइंडसेट ही आदमी की सफलता का आधार होता है।

https://en.wikipedia.org/wiki/Manish_Sisodia

बहुत बार परिवार , वंश  अथवा आसपास का वातावरण माइंडसेट को बनाने में मददगार साबित होता है लेकिन यह जरूरी नहीं की किसी परिवार और आसपास के वातावरण पर ही बच्चे का माइंडसेट बनना निर्भर हो व्यक्ति अपनी खुद की साधना मेहनत और प्रशिक्षण से वह माइंड सेट  हासिल कर सकता है जो उसे आगे लेकर जाने की प्रेरणा और शक्ति देता है और सफल बनाता है यहीं पर शिक्षा की भूमिका शुरू होती है विशेषकर स्कूलों की जहाँ जाने अनजाने बच्चों की मानसिकता का गठन हो रहा है।

इस बार दिल्ली शिक्षा में दिल्ली के शिक्षकों के लिए और शिक्षाविदों के लिए Fixed MindSet  और Growth MindSet पर विस्तार से चर्चा है। क्योंकि शिक्षा का काम केवल स्किल और नॉलेज देना ही नहीं है बल्कि बच्चों को सोच देना भी है।  बच्चों को सोच देने का काम यानी बच्चों के अंदर एक माइंडसेट देने का काम हम सभी अभी भी अनजाने में कर रहे हैं। लेकिन यह वैज्ञानिक ढंग से नहीं किया जा रहा है। बच्चे का MindSet अपने परिवार अपने आसपास के समाज और हर जगह से कुछ न कुछ पा कर के बन रहा है अब समय आ गया है इस पर हम सभी को मिलकर के साथ प्रयास किए जाएं तो हर बच्चे को  Growth MindSet के साथ सोचना सीखा सकते

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