एक कदम हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा पर निबंध।

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दोस्तों आजकल हम सभी लोग स्वच्छ ऊर्जा , हरे भरे वातावरण की बात क्यों करते है। हम सभी को पता है कैसे विश्व के बड़े बड़े देश और उनके बड़े बड़े शहर जानलेवा प्रदूषण की मार झेल रहे है। पूरा विश्व अब हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा की और बढ़ रहा है। लेकिन अगर मनुष्य अब भी अपने प्राकृतिक ऊर्जा के साधनों का उपयोग सही ढंग से नहीं करता है। तो यह मानव जीवन के लिए बहुत ही ख़तरनाक होगा।

एक कदम हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा पर निबंध।

आधुनिक युग में विज्ञान ने बहुत तरक्की की है। मनुष्य विकास के मार्ग पर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। उसने समय के साथ बड़े-बड़े कारख़ानों , औधोगीकरण के नाम पर बनाई गई फैक्ट्रीज , हरे-भरे वातावरण को नुकसान पहुँचा कर बनाई गई बड़ी – बड़ी इमारतें , नदियों और समुन्द्र में बनाएं गए बांधो ने हमारे वातावरण को दोनों तरह से नुकसान पहुँचाया है।

औधोगीकरण से होने वाले वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव

औधोगीकरण में बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होने वाले संसाधन जैसे :- कोयला , पट्रोल , डीज़ल , गैसे , जलती हुई लड़कियाँ  कूड़ा-करकट सभी वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड ( Co2) गैस छोड़ते है , जो पृथ्वी का तापमान बढ़ा रही है। जिससे होने वाले परिणाम

तापमान बढ़ने से बड़े हिमखंड , शीतखंड (बर्फ) पिघल जाएंगे।  जिससे समुन्द्र का स्तर बढ़ जाएगा और समुन्द्र के तटीय क्षेत्र डूबने की कगार पर आ जायेगे। यह एक पत्र की लाइन है जो सयुंक्त राष्ट्रसंघ को सन 1987 में मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा लिखा गया था “उन्होंने लिखा की ग्रीन हाउस गैस के असर से होने वाले दुष्प्रभाव के कारण हमारा पूरा देश समुन्द्र में डूब जाएगा।

जिसके कारण वायु प्रवाह में बदलाब के साथ ज्यादा तूफ़ान आने शुरू हो जाएंगे। तथा पृथ्वी पर रहने वाले जीव जंतु को भी जान का ख़तरा बढ़ जाएगा।

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औधोगीकरण से ऊर्जा स्रोतो का हनन

पृथ्वी पर मौदूद ऊर्जा के अनवीनकरणीय स्रोत जैसे : पट्रोल , डीज़ल, कोयला तथा प्राकृतिक गैस जिनके भंडार सिमित मात्रा में है। यह भंडार एक बार समाप्त होने के बाद दुबारा बनने में इन्हे हजारों साल लग सकते है। इसलिए हमें इनका इस्तेमाल सिमित मात्रा में करना चाहिए।

इन स्रोतों का अत्याधिक उपयोग ही वायु प्रदूषण और ग्रीन हाउस प्रभाव का मुख्य: कारण है।

पानी का गिरता हुआ भू-स्तर पुरे विश्व के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। देश विदेश में ऐसे कई शहर है जहाँ पीने के लिए पानी की मात्रा बहुत कम होती जा रही है और वहाँ सूखा पड़ने जैसी स्तिथि आ गई है।

स्वच्छ और हरित ऊर्जा का उपयोग क्यों जरुरी है।

प्रकृति में ऊर्जा के स्रोतों की एक सीमित व्यवस्था है। और हम सभी को पता है की ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए कितनी महत्वूर्ण होती है। यह औद्योगिक क्षेत्र के साथ मानव जीवन को भी मजबूती प्रदान करती है। अतः हम हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा (नवीनीकरण ऊर्जा) का उपयोग करके वातावरण को स्वच्छ रखने के साथ भविष्य में अनवीनकरणीय स्रोतो को भी बचा पाएँगे। यह ग्रीन हाउस प्रभाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य में से एक है।

पर्यावरण को साफ सुथरा बनाने के प्रयास में भारत ने ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) एवं स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने के लिए कदम बढ़ाए है। भारत की प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत विश्व में विकसित देशो के मुक़ाबले बहुत कम है। ऐसे में भारत जब अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए और लोगों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए नए उद्योग और शहर deveploment की तरफ कदम बढ़ायेगा तोयहाँ ऊर्जा की भी खपत बढ़ेगी। जो भारत के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होगी।

जीवाश्म ईंधन के मामले में भारत की स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है। भारत में आर्थिक विकास और ऊर्जा की ख़पत निचले स्तर पर होने के बावजूद भी वायु प्रदूषण और अन्य पर्यावरण के खतरे चिंताजनक स्थिति में है। हमें यह देखना होगा कि भारत अपनी ऊर्जा चुनौतियों की व्यवस्था कैसे करता है। जो कि आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

भारत के पास प्राकतिक संसाधनों की बात करे तो दुनिया का केवल 0.6% प्राकृतिक गैस (natural gas ) और 0.3% तेल भंडार (OIL) यहाँ मौदूद है। कच्चे तेल के लिए भारत खाड़ी देशो पर निर्भर रहता है।  तेल की बढ़ी कीमत 6 – 8% पहुंच गई है! भारत अभी भी ऊर्जा CO2 से संबंधित तीसरा सबसे वैश्विक उत्सर्जक देश है! बिजली का उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले स्रोत ग्रीनहाउस गैस को वातावरण में बढाने में मददगार साबित हो रहे है।

दोस्तों अगर हम हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा की तरफ कदम बढ़ाते है तो यह हमारे वातावरण को विषैले पदार्थ , कोयला खनन पदार्थ और गैस के प्रभावों से भी बहुत हद तक छुटकारा दिला सकती है। आज भी लगभग 300 करोड़ लोग खाना पकाने के लिए लकड़ी कोयला या गोबर से बने ईंधन पर निर्भर है। और यह वायु प्रदूषण का सबसे महत्वपूर्ण कारण है। जो पुरे विश्व में हर वर्ष 9 मिलियन से ज्यादा लोगों की मृत्यु का कारण बनता है।

स्वच्छ और हरित ऊर्जा का उपयोग।

भारत ने अपने बिजली क्षेत्र में अनवीनकरणीय स्रोतो का उपयोग कम करने लिए 2022 तक 175 Gigawatt तक बिजली का उत्पादन (Renewal energy ) अक्षय ऊर्जा के माध्यम से करने का टारगेट तैयार किया है। भारत सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा की कम लागत का फायदा उठाकर अपने यहां व्यवसाय में बिजली के लिए ज्यादा से ज्यादा अक्षय स्रोतों का उपयोग करने वाला पहला देश बन सकता है।

भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 400 – 450 GigaWatt बिजली उत्पादन अक्षय ऊर्जा (सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा) से हासिल करने का लक्ष्य रखा है। भारत को इसके लिए आर्थिक और तकनीकी रूप से तैयार होने की जरुरत है।

स्वच्छ नवीनीकरण ऊर्जा का उपयोग पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। यातायात में इस्तेमाल होने वाले : कोयला , पट्रोल , डीज़ल का उपयोग कम करके हमें Electrical Vehicles का इस्तेमाल करना चाहिए।

हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा भविष्य 

पुरे विश्व को इस हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा की तरफ एक साथ मिलकर कदम बढ़ाना है। जिसके लिए सभी देशो को मिलकर काम करना पड़ेगा। 

ऊर्जा की मांग को देखते हुए हमें आपूर्ति के लिए हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा के मार्ग को अपनाना होगा जैसे :

  • पनबिजली ऊर्जा, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा अक्षय ऊर्जा के स्रोत हैं।
  • सौर ऊर्जा एवं बैटरी पर आधारित भंडारण को बढ़ावा देना।
  • बिजली कंपनियां की आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए नवीकरण ऊर्जा उपकरणो को कम शुल्क में उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाना।
  • अनवीकरणीय परियोजनाओं जैसे : जैव ईंधन के लिए जंगलों की कटाई, जीवाश्म ईंधन का उपयोग करने की अपेक्षा में पर्यावरण के लिए अधिक हानिकारक है।

 

“दोस्तों आपको हमारा यह निबंध लेखन हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा पर निबंध कैसा लगा आप हमें कमैंट्स बॉक्स में जरूर बताएं ”

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