होली पर निबंध Holy Essay in hindi

होली पर निबंध , Holy essay in hindi , holy par nibandh

दोस्तों कड़कड़ाती हुई सर्दियाँ के जाने बाद पुरे भारत में मौसम बहुत सुहावना होना शुरू हो जाता है। बसंत ऋतु का आगमन होने हर तरफ नई ऊर्जा का संचार होने लगता है। पुरे भारत में बड़े ही हर्षो उल्लाष से मनाया जाने वाला होली का त्यौहार भी इन्ही दिनों में आता है।

भारतीय हिन्दू कैलेंडर के अनुसार होली का त्यौहार प्रति वर्ष के फ़ाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली का त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार फ़रवरी महीने में मनाया जाता है। होली हिंदुओं का धार्मिक त्योहार है। होली खुशियां और रंगों का त्योहार है।

वर्ष 2021 में होली का त्यौहार (होली 2021) 

होलिका दहन : – 28 March

रंगों की होली :- 29 March

होली पर निबंध (holy par nibandh)

भारत देश त्योहारों का देश है। होली का त्यौहार पुरे देश को एक रंग में रगने वाला त्यौहार माना जाता है। इस दिन सभी भारतवासी एक दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते है। यह त्यौहार आपसी भाईचारे की एक पहचान है। यह त्यौहार बच्चों के लिए बहुत ही खास त्योहारों में से एक होता है।

होली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है

साल का पहला त्यौहार होली को मनाने के पीछे एक प्राचीन इतिहास है। आदि काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक दुष्ट राजा था। वह स्वयं को भगवान मानता था।वह अपनी प्रजा पर बहुत ही हत्याचार करता था तथा अपने राज्य के लोगों से अपनी पूजा करवाता था।

हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था। जिसका नाम प्रह्लाद था प्रह्लाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। हिरण्यकश्यप इस बात को बिल्कुल पसंद नहीं करता था वह भगवान विष्णु का विरोधी था। उसने प्रह्लाद को विष्णु की भक्ति करने के लिए बहुत रोका।

लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन थे और वह अपने राज्य में बहुत नेक काम किया करते थे। वह राजा हिरण्यकश्यप को गलत रस्ते पर जाने से रोखने का प्रयास करते थे। इससे नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को कई बार दंड देने का प्रयास किया लेकिन वह हर बार इसमें विफल हो जाता था।

राजा हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को जान से मारने के लिए एक उपाय सोचा। इसके लिए हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया होलिका को आग में ना जलने का वरदान मिला हुआ था। हिरण्यकश्यप ने होलिका के साथ मिलकर प्रह्लाद को मारने का उपाय सोचा था। गांव के बीच में चिता बनाई गई।

होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई। उसके बाद होलिका जलकर भस्म हो गई और प्रहलाद को कुछ भी नहीं हुआ। इसके बाद राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी गलती का अहसास हुआ। यह कहानी हमें बताती है कि बुराई पर अच्छाई की जीत अवश्य होती है।

होली का त्यौहार

बुराई पर अच्छाई की जीत और होलिका के जलने की खुशी में फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। और अगले दिन सुबह उठकर रंगों का त्योहार मनाया जाता है।  होली का त्यौहार भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। जिसके रंग अनेकता में एकता को दर्शाते हैं।

होली का त्यौहार हर उम्र के लोग बड़ी ही खुशी के साथ मनाते है। बच्चों की टोलियां एक दूसरे पर रंग डालते हैं। और बड़ो से गुलाल लगाते हुए आर्शीवाद लेती है। महिलायें घरो में गुंजिया , पापड़ , तरह तरह की नमकीन बनाती है। घरों में गुजिया पापड़ मिठाइयां खिलाई जाती हैं।

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लोग एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं। कुछ लोग रंगो से भी होली खेलते हैं। इस दिन घर घर जाकर गीत गाए जाते हैं।  होली का त्योहार लोग आपस में गले लग कर एक दूसरे को रंग लगाकर मनाते हैं।

भारत में होली का उत्सव तरह तरह से मनाया जाता है आज भी मथुरा में होने वाली ब्रज की होली और बरसाने की लठमार होली पुरे भारत में बहुत प्रसिद्ध है।होली रंगों और खुशियों का त्योहार है।

होली पर निबंध , holy essay in hindi 

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