Essay on privatization भारत में निजीकरण निबंध

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भारत में सरकारी उपक्रम या सरकारी संस्थानो के मुक़ाबले प्राइवेट संस्थानों एवम प्राइवेट कंपनी की बात करे तो बहुत बड़ा अंतर नजर आता है। सभी लोग सरकारी स्कूल एवं सरकारी हॉस्पिटल में नौकरी तो करना पसंद करते है। लेकिन अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना पसंद नहीं करते है। सरकारी संस्थानों के निजीकरण , निजीकरण क्या है ?

सरकारी संस्थान में Disinvestment (सरकारी उपक्रम के कुछ percent शेयर प्राइवेट कंपनी को sell कर देना disinvestment कहलाता है )

Essay On Privatization भारत में निजीकरण पर निबंध

आज़ादी के बाद से भारत की पिछड़ती हुई अर्थव्यवस्था को विकास के मार्ग पर लाने के लिए सरकारों ने बहुत से प्रयास किये जिनमे सबसे महत्वपूर्ण कदम था देश में लागू होने वाली पंच वर्षीय योजना (Five year plan) लेकिन इन सब प्रयासों के बाद भी भारत की अर्थ-व्यवस्था लगातार पिछड़ती जा रही थी।

भारत सरकार के अंदर काम करने वाली सभी महत्वपूर्ण संस्थान / कंपनी देश की अर्थ-व्यवस्था में ज्यादा योगदान नहीं दे पा रही थी। जहाँ पुरे विश्व के बाज़ार नए नए आयामों को छू रहे थे वही भारत के बाजार पुराने ढर्रे पर चल रहे थे। उस समय के भारतीय बाज़ारो को Licence Raj (लाइसेंस राज) कहा जाता था।

सन 1991 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री P . V Narasimha Rao ने देश के तत्कालीन वित् मंत्री श्री मनमोहन सिंह (Shree Manmohan Singh) जी को देश में चल रही आर्थिक कमी को पूरा करने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। जिसके बाद वित् मंत्री श्री मनमोहन सिंह जी ने संसद में बजट पेश करते हुए महत्वपूर्ण ऐलान किए। जिसके बाद देश में Privatization का मार्ग खुला।

Important point on Privatization

देश में आर्थिक विकास के लिए बनाए गए नए मॉडल को  1991 Economic Reform कहा गया था। इसका उद्देश्य सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व के सामने तेजी से विकासशील अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाना था।

इसके लिए तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया गया।

Liberalisation (उदारीकरण)

Economic Reform 1991 से पहले भारतीय बाजार में विदेशी बाज़ारो से व्यापार करने के लिए पूरी तरह बंद थे। विदेशी व्यापार करने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में टैक्स देना पड़ता था।

भारतीय व्यापार में उदारीकरण का मतलब है कि बाजार से लाइसेंस राज को समाप्त कर दिया गया था तथा आर्थिक और सामाजिक नीतियों में सरकार का नियंत्रण कम कर दिया गया था। 24 जुलाई 1991 में उदारीकरण आर्थिक प्रक्रिया की शुरुआत की गई थी।

Privatization (निजीकरण)

1991 में तत्कालीन भारत सरकार द्वारा लाई गई निजीकरण की निति का अर्थ है कि सरकारी क्षेत्रों के उद्यमों व्यवस्थाओं और सेवाओं को निजी या प्राइवेट क्षेत्र को सौंप देना। यह निर्णय का उस समय की विरोधी राजनैतिक पार्टियों ने पुरजोर विरोध किया था।

Globalisation (वैश्वीकरण)

वैश्वीकरण का अर्थ पूरे देश की अर्थव्यवस्था और विश्व की अर्थव्यवस्था का एकीकरण ही वैश्वीकरण कहलाता है। अपने देश के बाजार को सभी के लिए खोल देना की कोई भी विदेशी कंपनी भारत में आकर यहाँ के नियम और कानूनों के अंतर्गत व्यापार कर सकती है।

निजीकरण क्या है।

भारत सरकार के द्वारा किसी भी सरकारी संपत्ति को प्राइवेट कंपनीज या सेक्टर को बेचना निजीकरण (privatisation) कहलाता है। इसमें सरकार सरकारी संपत्ति का कुछ हिस्सा एवं उसके कुछ शेयर किसी प्राइवेट इंडस्ट्रीज के हाथों में सौंप देती है।

भारत सरकार के द्वारा किसी सरकारी संपत्ति का निजीकरण करने के पीछे कुछ कारण होते है।

1991 -92 में भारत सरकार का महत्वपूर्ण मदों के लिए कुल ख़र्चा : 1,13,422 करोड़ रूपए था। जो सन 2017 -18 में बढ़कर 21,46,736 करोड़ रूपए हो गया था। इस तरह के खर्चे को पूरा करने के लिए सरकार Disinvestment का सहारा लेकर सरकारी सम्पत्ति का निजीकरण कर देती है।

भारत सरकार के उपक्रम Air India ने सन 2007 -08 से लेकर आज तक कभी भी Profit नहीं कमाया है जबकि इसके लिए आम आदमी द्वारा दिए गए टैक्स में से सरकार 69,575 करोड़ रूपए इस पर खर्च कर रही है। ऐसे में सरकार इन सम्पत्तिओं को निजी हाथों में सौपना पसंद करती है।

कुछ ऐसी जगह जहां पर सरकार सही ढंग से काम नहीं कर पा रही है। उसकी कुछ यूनिट्स को प्राइवेट सेक्टर के हाथों में दे देना चाहिए। वह निजीकरण होता है। जो निजी कंपनियों के हाथों में चला जाता है।

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भारत मे निजीकरण

आज़ादी के बाद से ही भारतीय अर्थव्यवस्था को निर्यात में कमी और आयात में वृद्धि और ऊंची मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ रहा था। जिसके लिए मनमोहन सिंह जी ने वित् मंत्री रहते हुए 1991 में भारत ने अपनी नीतियों में परिवर्तन किया .

सार्वजनिक क्षेत्र की उन्नति करने के लिए उसमे निजी (private) उद्योगों को अवसर दिया गया और इस कार्य के लिए उदारीकरण , निजीकरण , वैश्वीकरण की नीति बनाई गई।

निजीकरण और उदारीकरण की नीतियों को देश में लागू करने पर ही उस देश का बाज़ार वैश्वीकरण की तरफ बढ़ जाता है। इन नीतियों से भारत सहित बहुत देशों पर नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव हुआ

1991 में शुरू की गई economic reform नीतियों से भारत के कुछ क्षेत्र को बहुत लाभ हुआ जैसे सूचना, प्रौद्योगिकी, मनोरंजन, व्यापार, निर्माण कार्य, दूरसंचार आदि।

लेकिन इन सुधारों से कृषि में लाभ नहीं हुआ इस क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश की कमी आई।

निजीकरण के मुख्य उद्देश्य

  •  ज्यादा कार्यकुशलता और उत्पादन
  •  शिक्षित युवाओं को रोजगार में अवसर देना
  •  रोजगार में वृद्धि
  •  मुद्रा की आय में वृद्धि
  •  आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाना
  •  विश्व अर्थव्यवस्था के साथ मिलकर चलना

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