Green House Effect क्या होता है।

दोस्तो पुरा विश्व ही आजकल बढ़ते प्रदुषण की मार झेल रहा है।  विश्व के सभी देश शहरों में बढ़ते प्रदुषण से परेशान है।  इसी बीच ऐसे देश जो समुन्द्र के किनारे या टापूओं पर बसे हुए है। उन्हें Green House Effect मतलब गर्माती घरती का डर भी सता रहा है।

Green House Effect क्या है ? / Green House Effect के प्रभाव ? / Green House Effect बड़ने का कारण ?

आज हम ऊपर दिए गए इन सवालों का जबाव जानने की कौशिश करेगे .

Green House Effect क्या है।

जब दिन में सूरज की किरणें घरती पर पड़ती है तो घरती धीरे-धीरे गर्म होने लगती है जैसे जैसे सूर्य की रोशनी कम होने लगती है गरती की गर्माहट भी कम होने लगती है दिन भर की तपी हुई धरती गर्मी छोडने लगती है।

धरती दुआरा छोड़ी गई गर्मी आमतौर पर आकाश की तरफ जाने लगती है। लेकिन गर्म हवाओं के उल्टा जाते वक्त ही वातावरण में मौदूद Green House गैस बीच में आ जाती है। जिससे यह गर्मी पूरी तरह से आकाश की तरफ नहीं जा पाती और घरती पर ही वापस आ जाती है।

जिससे घरती के तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी हो जाती है। और यही तापमान में होने वाली वृद्धी मानव जीवन के खतरनाक साबित हो रही है।

आईये आपको Green House Effect क्या है और अच्छी तरह समझाने की कौशिश करते है।

हम सभी जानते है की घरती के आस पास वायुमंडल यानि हवा का घेरा होता है वायुमंडल कई गैस से मिलकर बना होता है। जैसे :- ऑक्सीजन , नाइट्रोजन ,कार्बन डाईऑक्साइड और पानी की भाप , आदि

इनमे से कुछ गैस ऐसे होती है जो धरती दुआरा छोड़ी गयी गर्मी को आकाश में जाने से रोक लेती है।  और फिर ये किरने आकाश में जाने की बजाएं वापस घरती पर ही लोट आती है। जिससे घरती पर तापमान बढ़ जाता है।  इसलिए इन गैस को ही Green House गैस कहते है।

और इस पूरी  प्रक्रिया को ही Green House Effect कहा जाता है।

Green House Effect नाम कैसे पड़ा।

दोस्तों दुनिया में कई देश ऐसे है जहाँ  बहुत कड़ाके की ठंड पड़ती है और गर्मी ज्यादा नहीं होती है ऐसे हालत में वहाँ कई तरह के पैड-पौधे पनप ही नहीं पाते इससे निपटने के लिए वहाँ एक विशेष तरीका खोजा गया

जिसमे ऐसे बगीचे बनाये जाते है जिनकी दीवार और छत कांच की बनी होती है। क्योकि कांच सूरज की रोशनी को अन्दर तो आने देता है। लेकिन इसके दुआरा प्राप्त हुई गर्मी को पूरी तरह से बाहर नहीं जाने देता जिससे कांच के अन्दर का तापमान बढ़ जाता है

और वह पेड़-पौधे के लिए मददगार साबित होता है इसी को Green House कहा जाता है इसी तरह से प्रथ्वी के तापमान को बढ़ाने में कांच की जगह वातावरण में मौदूद ये गैस काम करती है।

इसलिए इन गैस को Green House gas कहा जाता है और पुरे प्रोसेस को Green House Effect कहा जाता है।

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Green House Effect बढ़ने का कारण

Green House Effect बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। वायुमंडल में ऐसी गैसों का बढना जो प्रथ्वी से आकाश की लोटने वाली किरणों को रोक लेती है।  विज्ञानिकों के मुताबिक वायुमंडल में इन गैस की मात्रा लगातार बढ़ रही है। जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी Green House Effect का असर भी बढ़ रहा है।

विज्ञानं के अनुसार पिछले 100 सालो में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा प्रथ्वी पर 25 % बढ़ गयी है। और ऐसा माना जाता है। की कुल Green House Effect में से आधा तो कार्बन ऑक्साइड की वजह से ही होता है।

बाकि आधा मीथेन , कार्बन, नाइट्रस ऑक्साइड आदि गैसों की वजह से होता है। प्रथ्वी पर इन गैसों के मात्रा भी दिन प्रतिदिन बहुत तेजी से बढ़ रही है। जैसे वायुमंडल में मीथेन की मात्रा ही सालाना 14 % की दर से बढ़ रही है।

इन गैसों का वातावरण में इतना तेजी से बढना मानव जीवन के लिए बहुत चिंताजनक है।

यह गैस वातावरण में इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है।

कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा में होने वाली बढोत्तरी का कारण है।  कोयला , लकड़ी , कंडे , मट्टी का तेल , डीज़ल , पेट्रोल आदि को जलाना क्योकि इनको जलाने से निकलने वाले धुएं से ही कार्बन डाईऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है।

पेड़-पौधे कार्बन डाईऑक्साइड गैस और पानी को मिलाकर अपना खाना बनाते है। पेड़-पौधे द्वारा की जाने वाली इस क्रिया की वजह से वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा कम हो जाती है।

लेकिन अब लगातार जगलों के कटने की वजह से पेड़-पौधे कम होते जा रहे है। जिसके परिणामस्वरूप वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा में  बढ़ोत्तरी हो रही है।

Green House Effect के प्रभाव

दोस्तों जैसे हमने अभी पढ़ा की Green House Effect होने के कारण घरती का तामपान लगातार बढ़ रहा है। जिससे प्रथ्वी का औसत तापमान साल दर साल बढ़ता जा रहा है।

विज्ञानिकों के अनुसार हर दस साल में प्रथ्वी का तापमान 0.20 सेंटी ग्रेड से 0.50 सेंटी ग्रेड की रफ़्तार से बढ़ रहा है। मतलब धरती का तापमान अगले 100 सालो में 20 सेंटीग्रेड से 50 सेंटीग्रेड तक बढ़ जायेगा

घरती के गर्म होने की वजह से हिम खंड (ग्लेसियर) के पिघलने की रफ़्तार बढ़ जायेगी। हिम खंड (ग्लेसियर) के पिघलने की वजह से समुन्द्र का जल स्तर बढ़ जाता है। जिसके कारण समुन्द्र के किनारे बसें देश और शहरो का जल मग्न होने का खतरा बढ़ रहा है।

वर्ष 2018 में Green House गैस का उत्सर्जन सबसे ज्यादा मात्रा में हुआ था।  यह नंबर हर साल बढ़ते जा रहे है।

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