Guru Ravidas Jayanti 2021 क्यों मनाई जाती है।

Guru Ravidas jayanti 2021  गुरु रविदास जयंती
Guru Ravidas Temple Tughlakabad श्री गुरु रविदास मंदिर दिल्ली के तुग़लक़ाबाद में स्तिथ है। श्री गुरु रविदास जी सन 1509 में दिल्ली में इसी स्थान पर ठहरे थे। इसलिए सभी लोग इस पवित्र स्थान में गहरी आस्था रखते है।

Guru Ravidas ji गुरु रविदास जी का जन्म सन 1450 में (14 -15 वी ) शताब्दी के बीच सीर गोवर्धनपुर नामक ग्राम में हुआ था जो उत्तरप्रदेश के वाराणसी में स्तिथ है। गुरु रविदास जी के पिता का नाम श्री संतोष दास था और उनकी माता का नाम श्री मती कलसा देवी था।

गुरु रविदास जयंती के अवसर पर ग्राम सीर गोवर्धनपुर वाराणसी  में प्रतिवर्ष रविदास जयंती को बहुत भव्य रूप से मनाया जाता है। इस वर्ष Guru Ravidas jayanti 2021 का पर्व 27 february के दिन है।

Guru Ravidas jayanti 2021

गुरु रविदास जी एक महान कवि होने के साथ साथ एक समाज सुधारक एवं आध्यात्मिक गुरु भी थे। गुरु रविदास जयंती हिंदी कैलेंडर के अनुसार माह की पूर्णिमा के दिन सम्पूर्ण उत्तर भारत में मनाई जाती है। श्री गुरु रविदास जी 15 वी शताब्दी के भक्ति आंदोलन के एक महान गुरु थे। वह भारत इतिहास के महानतम कवि कबीर दास के समकालीन थे।

गुरु रविदास जी के महान कविताओं को सिखों के पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल किया गया है। रविदास जी ने रविदास पंथ की शुरुआत की थी जिसको सभी घर्म के लोग समान रूप से मानते है। गुरु रविदास जी कहते थे की भगवान एक है और वह ही सर्वशक्तिमान है।

गुरु रविदास जी

रविदास जी के महान सिद्धांतो में से एक था कि मनुष्य की आत्मा ईश्वर का एक कण है। मानव को जीवन के सभी अनुष्ठानों के दौरान ईश्वर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वह कहते थे कि भगवान ने इंसान को बनाया है ना कि इंसान ने भगवान को। संत गुरु रविदास ने भाईचारे सहिष्णुता के बारे में लोगों को शिक्षा दिया करते थे।

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गुरु रविदास जी को जन्म से समाज में व्याप्त छुआ छात और भेदभाव का सामना करना पड़ा था। ऐसे में मंदिर में पूजा करना अथवा स्कूल में पढ़ाई करना बहुत मुश्किल था रविदास जी ने समाज में रहकर समाज से छुआ छात और भेदभाव को दूर करने का निर्णय लिया और लोगों को संदेश देना शुरू किया। की व्यक्ति अपने जन्म से बड़ा या छोटा नहीं होता बल्कि अपने कर्मों से होता है।

संत रविदास ने अपने ज्ञान से समाज को इस काली सोच को ख़त्म करने के लिए लोगो के बीच जाकर उनको ज्ञान की बाते बताई। वह मनुष्य में कोई भेदभाव को नहीं मानते थे। वह एक महान संत, दार्शनिक , कवि और समाज सुधारक थे।रविदास जी ने सब को आपस में मिलजुल कर शांति से रहने का उपदेश दिया।

रविदास पंथ Ravidas Jayanti

धर्म के पथ पर चलकर गुरु रविदास जी ने अपना जीवन यापन करने के लिए जूते चप्पल बनाने का भी काम किया था। लेकिन अपने पुरे जीवन काल में और आज भी गुरु रविदास जी बहुत सम्मान प्राप्त किया। Guru Ravidas Jayanti के दिन पुरे भारत के साथ विश्व भर में कई तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

गुरु रविदास जी के रविदास पंथ के अनुयाई पुरे विश्व में फैले हुए है जो गुरु रविदास जी के वचनों को follow करते हुए। इस पर्व को बड़ी ही तैयारी के साथ मनाते है। गुरु रविदास जी के फॉलोवर हर समाज में पाए जाते है। हिन्दुओ के पवित्र कथाओं में भी गुरु रविदास जी की कविताओं का वर्णन देखने को मिलता है। साथ ही सिखों के बीच रविदास की असीम मान्यता है।

संत गुरु श्री रविदास जी की मृत्यु 1540 को उनके जन्म स्थान वाराणसी में हुई थी। हमें उनकी महान सोच को अपने जीवन में बनाए रखनी चाहिए। और होने मनुष्य के बीच जाति और घर्म के नाम पर होने वाले भेदभाव को दूर करना चाहिए।

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